Paralympics in hindi | पैरालंपिक: इतिहास, विशेषताएं, प्रकार, पैरालंपिक क्या होता है? | इतिहास , विशेषताएं , महत्व प्रकार | Types of Paralympic Games, पेरिस पैरालंपिक 2024 | Paris Paralympic 2024
पैरालंपिक क्या होता है? | Paralympic Games
पैरालंपिक एक अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजन है, जिसमें शारीरिक, मानसिक या अन्य विकलांगताओं से ग्रस्त एथलीट हिस्सा लेते हैं। यह खेल ओलंपिक खेलों के समानांतर आयोजित होते हैं और इन्हें दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण और प्रतिष्ठित खेल आयोजनों में से एक माना जाता है। पैरालंपिक खेलों का आयोजन हर चार साल में किया जाता है, और यह ओलंपिक खेलों के तुरंत बाद उसी स्थान पर होते हैं।
पैरालंपिक खेलों की विशेषताएं | Features of the Paralympic Games
पैरालंपिक खेल ओलंपिक खेलों से कुछ अलग होते हैं, क्योंकि इसमें एथलीटों की श्रेणियां उनकी विकलांगताओं के आधार पर तय की जाती हैं। प्रत्येक विकलांगता के अनुसार खेलों को श्रेणीबद्ध किया जाता है ताकि एथलीटों को समान अवसर मिल सकें। इसके अलावा, खिलाड़ियों के लिए विशेष उपकरणों और व्यवस्थाओं का प्रबंध किया जाता है, ताकि वे अपनी सर्वश्रेष्ठ क्षमता का प्रदर्शन कर सकें।
पैरालंपिक खेलों में प्रमुख खेलों में एथलेटिक्स, तैराकी, व्हीलचेयर बास्केटबॉल, व्हीलचेयर रग्बी, टेबल टेनिस, साइक्लिंग, और पावरलिफ्टिंग शामिल हैं। शीतकालीन पैरालंपिक खेलों में आइस स्लेज हॉकी, स्कीइंग और बायथलॉन जैसे खेल होते हैं।
पैरालंपिक खेलों का महत्व | Importance of Paralympic Games
पैरालंपिक खेल वैश्विक स्तर पर विकलांग एथलीटों के लिए सबसे बड़े और प्रतिष्ठित खेल आयोजन हैं। ये खेल केवल प्रतिस्पर्धा का मंच नहीं हैं, बल्कि समाज में विकलांगता के प्रति जागरूकता बढ़ाने, समानता और समावेशिता को प्रोत्साहित करने का साधन भी हैं। पैरालंपिक खेल विकलांग खिलाड़ियों की अदम्य इच्छाशक्ति, संघर्ष और उत्कृष्टता का प्रतीक हैं। इनके माध्यम से यह संदेश दिया जाता है कि शारीरिक या मानसिक चुनौतियां किसी की क्षमता को परिभाषित नहीं कर सकतीं। पैरालंपिक खेल विकलांग व्यक्तियों के आत्म-सम्मान और समाज में उनकी पहचान को बढ़ावा देते हैं, जिससे समाज में सकारात्मक बदलाव और प्रेरणा का संचार होता है।
पैरालंपिक खेल का इतिहास | History of Paralympic Games
प्रारंभिक चरण: द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की शुरुआत
पैरालंपिक खेलों की शुरुआत द्वितीय विश्व युद्ध के बाद हुई। युद्ध के दौरान घायल हुए सैनिकों के पुनर्वास के लिए खेल को एक महत्वपूर्ण साधन के रूप में देखा गया। इस पहल की शुरुआत 1948 में ब्रिटेन के स्टोक मैंडविल अस्पताल में काम करने वाले न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. लुडविग गुटमैन ने की थी। उन्होंने युद्ध में घायल हुए सैनिकों के लिए एक तीरंदाजी प्रतियोगिता का आयोजन किया, जिसे “स्टोक मैंडविल गेम्स” के नाम से जाना गया। यह आयोजन उसी वर्ष लंदन ओलंपिक खेलों के समानांतर हुआ और इस आयोजन का उद्देश्य शारीरिक रूप से अक्षम सैनिकों को शारीरिक और मानसिक रूप से पुनर्वासित करना था।
1960: पहली आधिकारिक पैरालंपिक खेल
1948 में आयोजित स्टोक मैंडविल गेम्स की सफलता के बाद, यह आयोजन हर चार साल में होने लगा। 1960 में रोम में पहली बार पैरालंपिक खेलों का आयोजन हुआ, जिसे आधिकारिक पैरालंपिक खेलों का दर्जा दिया गया। इस प्रतियोगिता में 23 देशों के लगभग 400 एथलीटों ने हिस्सा लिया। यह पहली बार था जब विकलांग खिलाड़ियों के लिए एक अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजन को इतनी मान्यता मिली। इन खेलों को शुरू में “9th Annual International Stoke Mandeville Games” कहा गया, लेकिन अब इन्हें पैरालंपिक के रूप में जाना जाता है।
1976: शीतकालीन पैरालंपिक खेलों की शुरुआत
ग्रीष्मकालीन पैरालंपिक खेलों के बाद, 1976 में पहली बार शीतकालीन पैरालंपिक खेलों का आयोजन स्वीडन के ओरेंस्कॉल्डस्विक में हुआ। शीतकालीन पैरालंपिक खेलों में उन एथलीटों ने भाग लिया, जो सर्दियों के खेल जैसे आइस स्लेज हॉकी, स्कीइंग, और बायथलॉन में महारत रखते थे। यह खेल विकलांग एथलीटों के लिए एक और मंच बन गया, जहां वे अपने कौशल का प्रदर्शन कर सकते थे।
1988: ओलंपिक खेलों के साथ आयोजन
1988 सियोल ओलंपिक खेलों से पैरालंपिक खेलों को ओलंपिक खेलों के स्थान पर और समान आयोजन समिति द्वारा आयोजित किया जाने लगा। यह पैरालंपिक खेलों के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ था, क्योंकि इससे इन खेलों को और अधिक मान्यता मिली और विकलांग खिलाड़ियों के प्रति समाज की सोच में बदलाव आया। इससे पहले पैरालंपिक खेलों को अलग से आयोजित किया जाता था, लेकिन अब यह ओलंपिक खेलों के तुरंत बाद उसी स्थान पर होते हैं।
अंतर्राष्ट्रीय पैरालंपिक समिति (IPC) की स्थापना
1989 में, विकलांग खिलाड़ियों के खेल आयोजनों के प्रबंधन और विकास के लिए अंतर्राष्ट्रीय पैरालंपिक समिति (IPC) की स्थापना की गई। IPC का मुख्यालय जर्मनी के बॉन में स्थित है। IPC का मुख्य उद्देश्य पैरालंपिक खेलों का प्रबंधन और आयोजन करना है। यह संस्था यह सुनिश्चित करती है कि विकलांग खिलाड़ियों के लिए सभी खेलों का आयोजन समान रूप से हो और उन्हें आवश्यक समर्थन मिले।
पैरालंपिक खेलों का नाम और प्रतीक | Name and emblem of the Paralympic Games
“पैरालंपिक” शब्द ग्रीक भाषा के “पारा” (πᾰρᾰ) से लिया गया है, जिसका अर्थ है “समानांतर”। यह नाम ओलंपिक खेलों के समानांतर आयोजित होने वाले खेलों को दर्शाता है। पैरालंपिक का प्रतीक चिन्ह तीन रंगीन रेखाएं (लाल, नीली, और हरी) हैं, जिन्हें “अगिटोस” कहा जाता है। यह प्रतीक विभिन्न देशों और संस्कृतियों के खिलाड़ियों का एकजुटता का प्रतीक है, जो विभिन्न देशों से खेलों में भाग (हिस्सा) लेने के लिए एक साथ आते हैं।
आधुनिक पैरालंपिक खेल
पिछले कुछ दशकों में पैरालंपिक खेलों का विस्तार हुआ है और यह दुनिया के सबसे बड़े खेल आयोजनों में से एक बन गया है। हर चार साल में आयोजित होने वाले ग्रीष्मकालीन और शीतकालीन पैरालंपिक खेलों में एथलीटों की संख्या और खेलों की विविधता बढ़ती जा रही है। 2020 टोक्यो पैरालंपिक खेलों में 162 देशों के 4,400 से अधिक एथलीटों ने भाग लिया, जो पैरालंपिक खेलों के इतिहास में एक नया रिकॉर्ड था।
पैरालंपिक खेलों की श्रेणियां
पैरालंपिक खेलों में खिलाड़ियों को उनकी विकलांगता के आधार पर विभिन्न श्रेणियों में विभाजित किया जाता है। मुख्य श्रेणियों में शारीरिक विकलांगता, दृष्टिहीनता, और मानसिक विकलांगता शामिल हैं। इन श्रेणियों के आधार पर खिलाड़ियों के लिए विशेष खेल उपकरण और सुविधाओं का प्रबंध किया जाता है ताकि वे अपने खेल में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकें।
प्रमुख मील के पत्थर
- 1960, रोम: पहली बार पैरालंपिक खेलों का औपचारिक आयोजन हुआ।
- 1976, ओरेंस्कॉल्डस्विक (स्वीडन): पहली बार शीतकालीन पैरालंपिक खेलों का आयोजन हुआ।
- 1988, सियोल: पैरालंपिक खेलों का आयोजन पहली बार ओलंपिक स्थल पर हुआ।
- 1989: अंतर्राष्ट्रीय पैरालंपिक समिति (IPC) की स्थापना।
- 2000, सिडनी: पहली बार पैरालंपिक खेलों को व्यापक मीडिया कवरेज मिली, जिससे यह खेल अधिक प्रसिद्ध हुआ।
Paralympic Games Locations and Dates
Year | Location | Dates |
1960 | Rome, Italy | Sep 18-25, 1960 |
1964 | Tokyo, Japan | Nov 3-12, 1964 |
1968 | Tel Aviv, Israel | Nov 4-13, 1968 |
1972 | Heidelberg, Germany | Aug 2-11, 1972 |
1976 | Toronto, Canada | Aug 3-11, 1976 |
1980 | Arnhem, Netherlands | Jun 21-30, 1980 |
1984 | New York, USA / Stoke Mandeville, UK | Jun 17-30, 1984 |
1988 | Seoul, South Korea | Oct 15-24, 1988 |
1992 | Barcelona, Spain | Sep 3-14, 1992 |
1996 | Atlanta, USA | Aug 16-25, 1996 |
2000 | Sydney, Australia | Oct 18-29, 2000 |
2004 | Athens, Greece | Sep 17-28, 2004 |
2008 | Beijing, China | Sep 6-17, 2008 |
2012 | London, UK | Aug 29-Sep 9, 2012 |
2016 | Rio de Janeiro, Brazil | Sep 7-18, 2016 |
2020 | Tokyo, Japan | Aug 24-Sep 5, 2021 |
2024 | Paris, France | Aug 28-Sep 8, 2024 |
भारत और पैरालंपिक खेल
भारत ने 1968 में पहली बार पैरालंपिक खेलों में भाग लिया। तब से लेकर अब तक कई भारतीय एथलीटों ने पैरालंपिक खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। देवेंद्र झाझरिया, मरियप्पन थंगवेलु, दीपा मलिक, और शरद कुमार जैसे खिलाड़ियों ने भारत को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर गौरवान्वित किया है।
- देवेंद्र झाझरिया: दो बार पैरालंपिक स्वर्ण पदक विजेता, उन्होंने जैवलिन थ्रो में भारत को गौरव दिलाया।
- मरियप्पन थंगवेलु: 2016 रियो पैरालंपिक में ऊंची कूद में स्वर्ण पदक जीता।
- दीपा मलिक: भारत की पहली महिला पैरालंपिक पदक विजेता, जिन्होंने 2016 रियो पैरालंपिक में शॉट पुट में रजत पदक जीता।
पैरालंपिक खेल के प्रकार | Types of Paralympic Games
पैरालंपिक खेलों को दो मुख्य प्रकारों में विभाजित किया गया है: ग्रीष्मकालीन पैरालंपिक खेल और शीतकालीन पैरालंपिक खेल। अंतरराष्ट्रीय पैरालंपिक समिति (आईपीसी) ने अब तक 28 खेलों को मंजूरी दी है, जिनमें से 22 ग्रीष्मकालीन और 6 शीतकालीन खेल शामिल हैं। बैडमिंटन और ताइक्वांडो को टोक्यो 2020 में नए खेलों के रूप में जोड़ा गया था।
पैरालंपिक खेलों में एथलीटों को उनकी विकलांगता के आधार पर श्रेणियों में विभाजित किया जाता है। आईपीसी ने दस विकलांगता श्रेणियां निर्धारित की हैं, जो प्रत्येक खेल के लिए अलग-अलग होती हैं, ताकि एथलीट अपनी क्षमताओं के अनुरूप प्रतिस्पर्धा कर सकें।
1. ग्रीष्मकालीन पैरालंपिक खेल (Summer Paralympic Games):
ग्रीष्मकालीन पैरालंपिक खेलों में विभिन्न खेल विधाओं में प्रतिस्पर्धा होती है, जिनमें खिलाड़ी अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार भाग लेते हैं। इसमें शामिल प्रमुख खेल हैं:
ग्रीष्मकालीन पैरालंपिक खेलों की सूची (Summer Paralympic Games):
- एथलेटिक्स (Athletics)
- तैराकी (Swimming)
- व्हीलचेयर बास्केटबॉल (Wheelchair Basketball)
- व्हीलचेयर टेनिस (Wheelchair Tennis)
- बोचिया (Boccia)
- गोलबॉल (Goalball)
- व्हीलचेयर फेंसिंग (Wheelchair Fencing)
- जूडो (Judo)
- पैरा कैनोइंग (Para Canoeing)
- पैरा साइक्लिंग (Para Cycling)
- पैरा रोइंग (Para Rowing)
- पैरा शूटिंग (Para Shooting)
- पैरा आर्चरी (Para Archery)
- पैरा इक्वेस्ट्रियन (Para Equestrian)
- पैरा बैडमिंटन (Para Badminton)
- पैरा टेबल टेनिस (Para Table Tennis)
- सिटिंग वॉलीबॉल (Sitting Volleyball)
- व्हीलचेयर रग्बी (Wheelchair Rugby)
- पैरा ट्रायथलॉन (Para Triathlon)
- पावरलिफ्टिंग (Powerlifting)
- ताइक्वांडो (Taekwondo)
- फाइव-ए-साइड फुटबॉल (5-a-side Football)
ये सभी खेल ग्रीष्मकालीन पैरालंपिक के अंतर्गत आते हैं, और इन्हें विकलांगता के प्रकार और खिलाड़ियों की क्षमताओं के अनुसार श्रेणियों में विभाजित किया जाता है।
2. शीतकालीन पैरालंपिक खेल (Winter Paralympic Games):
शीतकालीन पैरालंपिक खेल बर्फ और सर्दी के वातावरण में खेले जाते हैं। प्रमुख खेलों में शामिल हैं:
शीतकालीन पैरालंपिक खेलों की सूची (Winter Paralympic Games):
- अल्पाइन स्कीइंग (Alpine Skiing)
- नॉर्डिक स्कीइंग (Nordic Skiing)
- क्रॉस-कंट्री स्कीइंग (Cross-country Skiing)
- बायथलॉन (Biathlon)
- स्नोबोर्डिंग (Snowboarding)
- आइस स्लेज हॉकी (Ice Sledge Hockey)
- व्हीलचेयर कर्लिंग (Wheelchair Curling)
शीतकालीन पैरालंपिक खेल मुख्य रूप से बर्फ और सर्दी की परिस्थितियों में खेले जाते हैं और इन खेलों में एथलीट विशेष उपकरणों का उपयोग करके प्रतिस्पर्धा करते हैं।
पेरिस पैरालंपिक 2024 | Paris Paralympic 2024
पेरिस 2024 पैरालंपिक खेल 28 अगस्त से 8 सितंबर, 2024 तक आयोजित होंगे। यह पहली बार है जब पेरिस में ग्रीष्मकालीन पैरालंपिक खेल आयोजित किए जाएंगे।
मुख्य जानकारी:
- तिथियां: 28 अगस्त – 8 सितंबर, 2024
- स्थान: पेरिस, फ्रांस
- एथलीटों की संख्या: लगभग 4,400
- खेलों की संख्या: 22
- इवेंट्स की संख्या: 549
- आधिकारिक वेबसाइट: paralympic.org/paris-2024
मुख्य विशेषताएं:
- प्रसिद्ध स्थल: खेल पेरिस के प्रसिद्ध स्थलों जैसे एफिल टॉवर, चातेऊ दे वर्साय और ग्रांड पैलेस में आयोजित होंगे।
- महिलाओं की भागीदारी: पिछले खेलों की तुलना में महिलाओं के लिए अधिक इवेंट्स रखे गए हैं, जिससे लैंगिक समानता को बढ़ावा मिलेगा।
- उन्नत तकनीक: खेलों में अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाएगा ताकि एथलीटों और दर्शकों का अनुभव और बेहतर हो सके।
खेलों की सूची:
- एथलेटिक्स, स्विमिंग, व्हीलचेयर बास्केटबॉल, व्हीलचेयर टेनिस, गोलबॉल, बोचिया, व्हीलचेयर फेंसिंग, जूडो, ताइक्वांडो, पैरा कैनोइंग, पैरा साइक्लिंग, पैरा रोइंग, पैरा शूटिंग, पैरा आर्चरी, पैरा इक्वेस्ट्रियन, पैरा ट्रायथलॉन, पैरा बैडमिंटन, पैरा टेबल टेनिस, सिटिंग वॉलीबॉल, व्हीलचेयर रग्बी।
टिकट जानकारी: टिकट अब खरीदने के लिए उपलब्ध हैं। अधिक जानकारी के लिए आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।
अपडेट्स के लिए जुड़े रहें: खेलों की तारीख नजदीक आने पर, एथलीटों, इवेंट्स और शेड्यूल से संबंधित अधिक जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।
पेरिस पैरालंपिक 2024: भारत का प्रदर्शन
पेरिस पैरालंपिक 2024 में भारत ने अब तक कुल 24 पदक जीतकर ऐतिहासिक प्रदर्शन किया है। खेलों के सातवें दिन भारत ने 4 नए पदक अपने नाम किए, जिससे भारत की पदक संख्या 24 हो गई। भारत ने इन पदकों में 5 गोल्ड, 9 सिल्वर, और 10 ब्रॉन्ज मेडल जीते हैं। खास बात यह है कि भारत ने पैरालंपिक में अपने पिछले रिकॉर्ड को भी तोड़ दिया है, जो टोक्यो 2021 में 19 पदक जीतने का था।
मुख्य पदक विजेता:
- हरविंदर सिंह: पहले भारतीय तीरंदाज, जिन्होंने पैरालंपिक में गोल्ड मेडल जीता।
- धर्मवीर: क्लब थ्रो F51 फाइनल में गोल्ड मेडल जीता।
- सचिन खिलारी: शॉट पुट F46 स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीता।
- पर्णव सोरमा: क्लब थ्रो F51 फाइनल में सिल्वर मेडल जीता।
- दीप्ति जीवनजी: महिला 400 मीटर टी20 कैटेगरी में कांस्य पदक जीता।
भारत ने पैरालंपिक पदक तालिका में लंबी छलांग लगाते हुए 13वें स्थान पर पहुंच गया है। पदक तालिका में शीर्ष पर चीन है, जिसने कुल 135 पदक जीते हैं, जबकि ग्रेट ब्रिटेन दूसरे स्थान पर है।
भारतीय पैरालंपिक खिलाड़ी और उनकी उपलब्धियां
पैरालंपिक खेलों में भारत का सफर प्रेरणादायक कहानियों और अद्वितीय उपलब्धियों से भरा हुआ है। भले ही भारत में पैरालंपिक खेलों को ओलंपिक की तुलना में कम प्रचार और समर्थन मिला हो, फिर भी हमारे भारतीय एथलीटों ने वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। भारतीय पैरालंपिक खिलाड़ियों की असाधारण उपलब्धियां उनकी दृढ़ संकल्प और असीम संघर्ष की कहानियां बयान करती हैं। इन खिलाड़ियों ने विकलांगता को कभी अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया और देश का नाम गर्व से ऊंचा किया।
1. देवेंद्र झाझरिया (Javelin Throw)
देवेंद्र झाझरिया भारतीय पैरालंपिक इतिहास के सबसे सफल एथलीटों में से एक हैं। उन्होंने दो बार पैरालंपिक स्वर्ण पदक जीतने का गौरव प्राप्त किया है।
- एथेंस पैरालंपिक 2004: देवेंद्र ने जैवलिन थ्रो में स्वर्ण पदक जीतकर भारत को गौरवान्वित किया। उनका यह प्रदर्शन ऐतिहासिक था क्योंकि उन्होंने 62.15 मीटर की दूरी तक भाला फेंककर विश्व रिकॉर्ड बनाया।
- रियो पैरालंपिक 2016: देवेंद्र ने फिर से इतिहास रचा, जब उन्होंने 63.97 मीटर की दूरी के साथ अपना ही विश्व रिकॉर्ड तोड़ते हुए दूसरा स्वर्ण पदक जीता। वह भारत के पहले पैरालंपिक खिलाड़ी हैं, जिन्होंने दो स्वर्ण पदक जीते हैं।
देवेंद्र झाझरिया की यात्रा संघर्ष से भरी रही है। बचपन में एक दुर्घटना के कारण उन्होंने अपना एक हाथ खो दिया था, लेकिन उनकी अदम्य इच्छा शक्ति और मेहनत ने उन्हें विश्व स्तर पर भारत का नाम रोशन करने में मदद की।
2. मरियप्पन थंगवेलु (High Jump)
मरियप्पन थंगवेलु भारतीय एथलेटिक्स में एक और चमकता सितारा हैं। उन्होंने ऊंची कूद में भारत को पैरालंपिक स्वर्ण पदक दिलाया।
- रियो पैरालंपिक 2016: मरियप्पन ने टी-42 कैटेगरी में 1.89 मीटर की छलांग लगाकर स्वर्ण पदक जीता। उनकी यह जीत अद्वितीय थी क्योंकि यह भारत के लिए एथलेटिक्स में पहला स्वर्ण पदक था।
- टोक्यो पैरालंपिक 2020: मरियप्पन ने अपने प्रदर्शन को जारी रखते हुए टोक्यो पैरालंपिक में रजत पदक जीता और फिर से अपने कौशल का प्रदर्शन किया।
मरियप्पन की कहानी भी प्रेरणादायक है। बचपन में एक दुर्घटना के कारण उन्होंने अपना एक पैर खो दिया, लेकिन इस विकलांगता ने उन्हें कभी रोका नहीं। उनके हौसले और मेहनत ने उन्हें एक सफल एथलीट बनाया।
3. दीपा मलिक (Shot Put and Javelin Throw)
दीपा मलिक भारतीय पैरालंपिक की पहली महिला एथलीट हैं, जिन्होंने पैरालंपिक खेलों में पदक जीता।
- रियो पैरालंपिक 2016: दीपा मलिक ने एफ-53 कैटेगरी में शॉट पुट में रजत पदक जीता। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के साथ वह भारत की पहली महिला पैरालंपिक पदक विजेता बन गईं।
दीपा की संघर्ष गाथा भी बेहद प्रेरणादायक है। 30 साल की उम्र में उन्हें स्पाइनल ट्यूमर के कारण चलने-फिरने में अक्षम हो गईं। लेकिन उन्होंने इस कठिनाई को कभी अपने सपनों के आड़े नहीं आने दिया और खेल में अपना करियर शुरू किया। दीपा मलिक ने खेलों के अलावा साहसिक खेलों में भी अपनी पहचान बनाई और कई बार विश्व रिकॉर्ड बनाए हैं।
4. शरद कुमार (High Jump)
शरद कुमार एक और भारतीय एथलीट हैं, जिन्होंने उच्च कूद में अपनी अद्भुत प्रतिभा का प्रदर्शन किया है।
- टोक्यो पैरालंपिक 2020: शरद ने टी-42 कैटेगरी में 1.83 मीटर की छलांग लगाकर कांस्य पदक जीता। यह उपलब्धि उनके अदम्य साहस और संघर्ष को दर्शाती है।
शरद कुमार की कहानी भी कठिनाइयों से भरी हुई है। बचपन में उन्हें पोलियो हो गया था, जिसके कारण उनकी एक टांग प्रभावित हुई। लेकिन उन्होंने इस विकलांगता को अपने सपनों के आड़े नहीं आने दिया और अपने देश के लिए गौरव हासिल किया।
5. सिंहराज अधाना (Shooting)
सिंहराज अधाना भारतीय शूटिंग में उभरते हुए पैरालंपिक खिलाड़ी हैं, जिन्होंने हाल के खेलों में शानदार प्रदर्शन किया है।
- टोक्यो पैरालंपिक 2020: सिंहराज ने पी1 पुरुष 10 मीटर एयर पिस्टल एसएच1 में कांस्य पदक और पी4 मिक्स्ड 50 मीटर पिस्टल एसएच1 में रजत पदक जीता। यह उनके लिए और भारतीय शूटिंग के लिए एक बड़ी उपलब्धि थी।
6. सुमित अंतिल (Javelin Throw)
सुमित अंतिल भारतीय पैरालंपिक खेलों के सबसे नए सितारों में से एक हैं।
- टोक्यो पैरालंपिक 2020: सुमित ने जैवलिन थ्रो में एफ-64 कैटेगरी में स्वर्ण पदक जीता और 68.55 मीटर की दूरी तक भाला फेंककर विश्व रिकॉर्ड बनाया।
सुमित अंतिल की कहानी भी एक कठिन यात्रा का प्रतीक है। उन्होंने एक सड़क दुर्घटना में अपना एक पैर खो दिया था, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने खेल के प्रति अपने जुनून को बनाए रखा और विश्व स्तर पर भारत का नाम रोशन किया।
7. अवनि लेखरा (Shooting)
अवनि लेखरा भारतीय पैरालंपिक खेलों की पहली महिला हैं, जिन्होंने शूटिंग में स्वर्ण पदक जीता है।
- टोक्यो पैरालंपिक 2020: अवनि ने महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल स्टैंडिंग एसएच1 कैटेगरी में स्वर्ण पदक जीता और एक विश्व रिकॉर्ड की बराबरी की। इसके साथ ही उन्होंने 50 मीटर राइफल में भी कांस्य पदक जीता।
पैरालंपिक और ओलंपिक में अंतर
1. उद्देश्य:
- ओलंपिक: यह खेल दुनिया के सर्वश्रेष्ठ एथलीटों के बीच प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने के लिए आयोजित किया जाता है, जहां खिलाड़ी विभिन्न खेलों में अपनी शारीरिक क्षमताओं का प्रदर्शन करते हैं।
- पैरालंपिक: यह खेल विशेष रूप से शारीरिक, मानसिक या दृष्टिहीनता जैसी विकलांगताओं वाले एथलीटों के लिए आयोजित किया जाता है, ताकि वे अपने खेल कौशल का प्रदर्शन कर सकें।
2. खिलाड़ी:
- ओलंपिक: इसमें सामान्य रूप से स्वस्थ एथलीट भाग लेते हैं, जो विभिन्न खेलों में प्रतिस्पर्धा करते हैं।
- पैरालंपिक: इसमें वे एथलीट भाग लेते हैं जिनके पास शारीरिक या मानसिक विकलांगता होती है। खिलाड़ियों को उनकी विकलांगता के प्रकार के अनुसार श्रेणियों में विभाजित किया जाता है।
3. खेलों की श्रेणियां:
- ओलंपिक: ओलंपिक खेलों में खेलों की संख्या अधिक होती है, जिसमें एथलेटिक्स, तैराकी, जिम्नास्टिक्स, फुटबॉल, बास्केटबॉल आदि जैसे खेल शामिल होते हैं।
- पैरालंपिक: पैरालंपिक खेलों में एथलेटिक्स, व्हीलचेयर बास्केटबॉल, व्हीलचेयर टेनिस, पैरा तैराकी, गोलबॉल आदि विशेष रूप से विकलांग खिलाड़ियों के लिए डिजाइन किए गए खेल शामिल होते हैं।
4. आयोजन का समय:
- ओलंपिक: ओलंपिक खेल हर चार साल में आयोजित होते हैं, और आमतौर पर यह ग्रीष्मकालीन और शीतकालीन संस्करण में विभाजित होते हैं।
- पैरालंपिक: पैरालंपिक खेल भी हर चार साल में आयोजित होते हैं और ओलंपिक खेलों के तुरंत बाद उसी शहर और स्थान पर होते हैं।
5. आयोजन संस्था:
- ओलंपिक: ओलंपिक खेलों का आयोजन अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) द्वारा किया जाता है।
- पैरालंपिक: पैरालंपिक खेलों का आयोजन अंतरराष्ट्रीय पैरालंपिक समिति (IPC) द्वारा किया जाता है।
6. खेल के प्रतीक और आदर्श:
- ओलंपिक: ओलंपिक के पांच इंटरलॉकिंग रिंग इसके प्रतीक हैं, जो विभिन्न महाद्वीपों की एकता को दर्शाते हैं।
- पैरालंपिक: पैरालंपिक का प्रतीक “अगिटोस” है, जो तीन वक्र रेखाएं (लाल, नीली और हरी) हैं, जो दुनिया भर से आने वाले एथलीटों को दर्शाती हैं।
7. पदक जीतने का उद्देश्य:
- ओलंपिक: पदक जीतने का उद्देश्य व्यक्तिगत और राष्ट्रीय गौरव प्राप्त करना होता है।
- पैरालंपिक: पदक जीतने के साथ-साथ विकलांग व्यक्तियों की क्षमताओं का प्रदर्शन और समाज में समानता का संदेश देना मुख्य उद्देश्य होता है।
इन मुख्य अंतर के बावजूद, दोनों खेल दुनिया भर के एथलीटों के बीच समान भावना, खेल कौशल और समर्पण को बढ़ावा देते हैं।
Paralympics FAQ
पहला पैरालंपिक कब और कहां हुआ?
पहला आधिकारिक पैरालंपिक खेल 1960 में रोम, इटली में आयोजित किया गया था।
पैरालंपिक खेलों का शुभंकर क्या था?
पेरिस 2024 पैरालंपिक खेलों का शुभंकर फ्रिजियन कैप (Phrygian Cap) है, जिसे "फ़्रिज़" कहा जाता है, जो स्वतंत्रता और समावेशिता का प्रतीक है।
ओलंपिक 2024 की थीम क्या है?
पेरिस 2024 ओलंपिक की थीम है "Games Wide Open", जो समावेशिता, खुलापन और विविधता का संदेश देती है।
पैरालंपिक में कौन भाग ले सकता है?
पैरालंपिक में वे एथलीट भाग लेते हैं, जो शारीरिक, मानसिक, या दृष्टिहीनता जैसी विकलांगताओं का सामना कर रहे होते हैं और उन्हें विकलांगता के अनुसार श्रेणीबद्ध किया जाता है।
पैरालंपिक में स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय महिला कौन बनी?
अब तक, दीपा मलिक ने 2016 में रजत पदक जीता, लेकिन स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला का अभी इंतजार है।
पहली भारतीय पैरालंपिक खिलाड़ी कौन है?
दीपा मलिक भारत की पहली महिला पैरालंपिक पदक विजेता हैं, जिन्होंने 2016 में रियो पैरालंपिक में शॉट पुट में रजत पदक जीता था।
भारत में पहला पैरालंपिक किसने जीता?
मुरलीकांत पेटकर ने 1972 म्यूनिख पैरालंपिक में स्विमिंग में भारत का पहला गोल्ड मेडल जीता।
पैरालंपिक का अर्थ क्या है?
पैरालंपिक" शब्द ग्रीक शब्द "पारा" (समानांतर) से लिया गया है, जिसका अर्थ है ओलंपिक के समानांतर आयोजित होने वाले खेल, जो विकलांग एथलीटों के लिए होते हैं।
पैरालंपिक में कितने खेल होते हैं?
पैरालंपिक खेलों में कुल 22 खेल होते हैं, जैसे एथलेटिक्स, तैराकी, व्हीलचेयर बास्केटबॉल, शॉट पुट, तीरंदाजी, आदि।
पैरालिंपिक 2024 में भारत के कितने खिलाड़ी हैं?
पैरालंपिक 2024 में भारत के करीब 54 एथलीट विभिन्न स्पर्धाओं में भाग ले रहे हैं।
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