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ग्लोबल वार्मिंग पर निबंध | Essay on Global Warming in hindi

नमस्कार पाठकों, इस लेख ग्लोबल वार्मिंग पर निबंध | Essay on Global Warming in hindi में आपका स्वागत है। इस लेख में हम ग्लोबल वार्मिंग के बारे में विस्तार से जानेंगे कि ग्लोबल वार्मिंग क्या है?, ग्लोबल वार्मिंग के दुष्प्रभाव, ग्लोबल वार्मिंग के लाभ और हानियां और इसके रोकथाम के उपाय क्या है?

यदि आप यह सभी जानकारी विस्तार से जानना चाहते हैं तो इस लेख को अंत तक जरूर पढ़िए। यह सभी जानकारी आपके लिए उपयोगी सिद्ध होगी। तो आइए जानते हैं!

ग्लोबल वार्मिंग (Globel Warming) क्या है?

ग्लोबल वार्मिंग भी पर्यावरण प्रदूषण की तरह एक गंभीर और जटिल समस्या बन गई है। ग्लोबल वार्मिंग पृथ्वी पर जीवन के लिए किसी वरदान से कम नहीं है परंतु पृथ्वी पर निरंतर बढ़ रहे तापमान के कारण यह किसी अभिशाप से कम नहीं है।

पृथ्वी के औसत तापमान में पिछले 100 वर्षों में 10 फॉरेनहाइट की वृद्धि हुई है इस कारण मौसम एवं वर्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। इस कारण हिमखंड एवं ग्लेशियर की निरंतर पिघलने से समुद्र तटीय दीप जलमग्न हो गए हैं एवं कई दिन जलमग्न होने की कगार पर है वनस्पति एवं जीव जंतुओं पर भी कई दुष्प्रभाव देखने को मिले हैं।

ग्लोबल वार्मिंग की परिभाषा

पृथ्वी के वातावरण में निरंतर तापमान वृद्धि हो रही है विश्वव्यापी तापमान वृद्धि को ग्लोबल वार्मिंग कहते हैं।

अर्थात जब पृथ्वी के वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ जाती है तो वायुमंडल के तापमान में बढ़ोतरी हो जाती है इस तापमान वृद्धि को ही ग्लोबल वार्मिंग कहते हैं।

ग्लोबल वार्मिंग का अर्थ

ग्लोबल वार्मिंग शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है ग्लोब तथा वार्मिंग। यहां पर ग्लोब का अर्थ है पृथ्वी और वार्मिंग का अर्थ है गर्म।

पृथ्वी के वायुमंडल के औसत तापमान में लगातार वृद्धि हो रही है। इस कारण महासागरीय जल के औसत तापमान में भी वृद्धि हो रही है।

अर्थात सरल शब्दों में कहें तो पृथ्वी के तापमान में होने वाली वृद्धि के कारण मौसम में होने वाले परिवर्तन को ग्लोबल वार्मिंग कहते हैं।

ग्लोबल वार्मिंग को हिन्दी में भूमंडलीय ऊष्मीकरण कहते हैं।

ग्लोबल वार्मिंग के कारण

ग्लोबल वार्मिंग के कई कारण हैं जैसे:-

  • ग्रीन हाउस गैसें
  • पर्यावरण प्रदूषण
  • जनसंख्या वृद्धि
  • औद्योगिकरण
  • जंगलों की अत्यधिक कटाई
  • ओजोन क्षय
  • उर्वरक व कीटनाशकों का अत्यधिक उपयोग आदि।

ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव

ग्लोबल वार्मिंग का वायुमंडल के औसत तापमान प्रभाव

पृथ्वी की वायुमंडल एवं महासागर का औसत तापमान बढ़ जाएगा ।पिछले एक दशक अर्थात 10 वर्षों में पृथ्वी के तापमान में 0.3 से 0.6 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हुई है आने वाले समय में इसी दर से लगातार तापमान वृद्धि जारी रही तो ग्लेशियर में जमावर पिघल जाएगी जिससे समुद्रों में पानी की मात्रा बढ़ जाएगी और समुद्र तटीय भूभाग का एक बहुत बड़ा हिस्सा एवं कई दीप समुद्र में जलमग्न हो जाएंगे इससे समुद्र तटीय लोग वेघर हो जाएंगे।

ग्लोबल वार्मिंग का मानव स्वास्थ्य पर प्रभाव

ग्लोबल वार्मिंग का सर्वाधिक प्रभाव मानव जीवन पर पड़ा है तापमान बढ़ने से मानव पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा जापान वृद्धि से कई जानलेवा बीमारियां मलेरिया डेंगू विद ज्वार येलो फीवर के रोगियों की संख्या में वृद्धि देखने को मिली है।

तापमान वृद्धि से घर को ठंडा रखने के लिए उपयोग किए जाने वाले विद्युत उपकरणों की संख्या भी पड़ जाएगी इस कारण ऊर्जा संकट भी उत्पन्न होगा।

ग्लोबल वार्मिंग का पशु पक्षियों और वनस्पतियों पर प्रभाव

ग्लोबल वार्मिंग के कारण पशु पक्षियों का वनस्पतियों पर भी बहुत गंभीर प्रभाव देखे गए हैं। पृथ्वी के वातावरण होने वाले तापमान वृद्धि का कई प्रजातियां पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है इस कारण यह प्रजातियां विलुप्त होने के कगार पर है।

ग्लोबल वार्मिंग को रोकने के उपाय

ग्लोबल वार्मिंग को रोकने के लिए कुछ सामान्य से उपाय हैं जिन्हें हमारे दैनिक जीवन में आदतों के रूप में शामिल करना होगा। जिससे हम पर्यावरण संरक्षण में अपना योगदान दे सकते हैं।

  • ऊर्जा संरक्षण के महत्व को समझे और अपने दैनिक जीवन में इसका अनुसरण करें।
  • घरेलू अपशिष्ट पदार्थों का सुरक्षित निपटारा करें।
  • डीजल व पेट्रोल से चलने वाले वाहनों का उपयोग सीमित करें।
  • वनों की कटाई न करें।
  • वृक्षारोपण करें।
  • जल संरक्षण करें।
  • वर्षा के जल का संधारण करें।
  • एयर कंडीशनिंग सिस्टम का कम से कम उपयोग करें।
  • जनसंख्या वृद्धि पर नियंत्रण करना चाहिए।
  • हुई सभी कार्यों को प्रतिबंधित कर देना चाहिए जिनसे ओजोन परत का क्षरण हो सकता है।

निष्कर्ष

भूमंडलीय ऊष्मीकरण अर्थात ग्लोबल वार्मिंग एक विश्वव्यापी समस्या है समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो इसके बहुत गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

ग्लोबल वार्मिंग का मुख्य कारण कार्बन डाइऑक्साइड गैस है परंतु मीथेन, क्लोरोफ्लोरोकार्बन, नाइट्रस ऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड तथा जल वाष्प इसके लिए जिम्मेदार है जिन्हें संयुक्त रूप से ग्रीन हाउस गैसें कहा जाता है।


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